मेरे साथी:-

Wednesday, January 25, 2012

एहसास तेरा

ढुँढती है नजरें तुझे हर दिन और हर रात,
आईने में नजरें अब तो तुझे तलाशती है ।

आहट तेरी करार है लेती अब तो हर हर एक पल,
भँवरों की गुँजन भी धुन तेरा सुनाती है ।

सपने तेरे मदहोश हैं करते अब निद्रा में हर रात,
जागती हुई आँखे भी ख्वाब तेरा दिखाती है ।

छुवन तेरा महसूस है करता ये मन हर लम्हा,
हवाओं की सरसराहट एहसास तेरा कराती है ।

खुशबू तेरी महकाती है अब बगिया में हरदम,
मादकता फूलों की भी याद तेरा दिलाती है ।

14 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. धन्यवाद कैलाश जी | स्नेह बनाये रखें |

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  2. har waqt sirf usi ka khyal
    yahi to pyar ka ahsas hai,
    bahut sundar pyari rachana hai.
    happy republic day...

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    1. बहुत बहुत आभार रीना जी |यूँही ब्लॉग में आती रहें |

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  3. बहुत सुंदर, भावपूर्ण अच्छी रचना,..

    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. आपको भी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.... :)
    आपकी कविता पढ़ , बहुत अच्छा लगा.... !

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    1. विभा जी बहुत बहुत धन्यवाद |

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  6. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 27/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. धन्यवाद माथुर साहब | आपका आभार |

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  7. भावपूर्ण कविता के लिए आभार...........

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    1. सुषमा जी आपका आभार | इसी तरह ब्लॉग में आती रहें |

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  8. सुन्दर प्रस्तुति...

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