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Thursday, January 26, 2012

मात-पिता के चरणों में

मात-पिता के चरणों में ही बसते तीरथ-धाम,
मात-पिता के चरण की माटी सौ चन्दन समान ।

मात-पिता की निःस्वार्थ सेवा, शत यज्ञ का फल दे,
मात-पिता पावन कर देते, गंगा का जल से ।

मात-पिता के स्नेह की छाया ताप में दे आराम,
मात-पिता के चरणों में ही बसते तीरथ-धाम ।

मात-पिता गुरु से भी बढ़कर, मात-पिता भगवान,
मात-पिता के संस्कारों से बनता कोई महान ।

मात-पिता की दया से मिलते हैं इस जग में नाम,
मात-पिता के चरणों में ही बसते तीरथ-धाम ।

मात-पिता के दरश से मिलते सुख, शक्ति प्रबल,
मात-पिता के हस्त जो सर पे सब कर्म लगे सरल ।

मात-पिता गुण-धाम हैं इनका क्या मैं करुँ गुणगान,
मात पिता के चरणों में ही बसते तीरथ-धाम ।

6 comments:

  1. माता - पिता गुण - धाम है इनका क्या मैं करूँ गुणगान ,
    सही है , उनके अहसानों का कर्ज कोई नहीं उतार सकता ,
    बहुत अच्छी सोच दर्शाती रचना.... !!!!

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  2. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद माथुर साहब |

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  3. माता पिता के प्रति ये प्यार और आदर बना रहे ...शुभ आशीष

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  4. jin logon ne mata pita ko pooja hai main unhen salam karta hun

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