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Thursday, January 19, 2012

परी मेरी अब सोयेगी


रात ये कितनी बाकि है,
पुछ रहा हूँ तारों से;
पवन सुखद बनाने को,
अब कहता हूँ बहारों से ।

चाँद को ही बुलाया है,
निद्रासन मंगवाया है;
परी मेरी अब सोयेगी,
भँवरों से लोरी गवाया है ।

डैडी की सुन्दर गुड़िया है,
मम्मी की जान की पुड़िया है;
क्यों रात को पहरा देती है,
ज्यों सबकी दादी बुढ़िया है ।

स्वयं पुष्पराज ही आयेंगे,
खुशबू मधुर फैलायेंगे;
निद्रादेवी संग चाकर लाकर,
मिल गोद में सब सुलायेंगे ।

परी मेरी न रोयेगी,
परी मेरी अब सोयेगी ।

20 comments:

  1. bahut pyaari lori ki tarah kavita.bahut sundar bhaav.

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  2. सपनों में चन्दा के गाँव जाएगी , परियों के संग खेलेगी ...

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  3. वाह ...बहुत खूब ।

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  4. बहुत प्यारी कविता

    परी बेटी सी प्यारी और दुलारी भी

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  5. कमाल की प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद अमृता जी |

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  6. घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहाँ, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (Friday) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. bahut pyari lori..
    bachpan ki yaad aayee..

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  8. बहुत ही खुबसूरत
    और कोमल भावो की अभिवयक्ति......

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  9. कोमल भावों से सजी सुंदर रचना ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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    1. आभार पल्लवी जी | यूँही आती रहें ब्लॉग में |

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  10. बहूत- बहूत, बहूत हि प्यारी कविता है...

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    1. धन्यवाद रीना जी | ब्लॉग में आना जारी रखे |

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