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Saturday, September 28, 2013

जख्मों का हिसाब (दर्द भरी हास्य कविता)

फटी-सी एक डायरी में,
लिख रखा है मैंने;
है पाई-पाई का तेरे,
हर जख्मों का हिसाब |

कब तूने तोड़ा दिल,
कब की थी रुसवाई;
कब हुई थी बेवफा,
हर तारीख है जनाब |

क्यों फोन का मेरे,
न दिया था जवाब,
भागती ही रही दूर,
ओढ़ नकली हिज़ाब |

पछताओगी एक दिन,
याद करोगी मुझको;
जब ढल जायेगा यौवन,
जब लगाओगी खिजाब |

वो मुस्कुराहट भी तेरी,
बेशर्मों-सी ही थी;
जब घुटनों के बल आके,
तुझे देता था गुलाब |

बस दोस्त कभी कहती,
कभी प्यार थी बनाती;
बिन पेंदी के लौटा का,
तुझे दूंगा मैं खिताब |

दुखाया है इस दिल को, 
तूने जाने कितनी बार;
आंसूं हैं दिए तूने,
मुझ गरीब को बेहिसाब |

झूठे तेरे प्रेम पत्र,
फेंक दिए हाँ मैंने;
कोई गिरा गंगा में,
कोई जा गिरा चिनाब |

कभी प्यार से की बातें,
कभी गोलियां जैसे बोली;
लहू-लुहान किया दिल को,
क्या तेरा भाई था कसाब ?

न हो तू यूँ बेताब,
तुझे मिल जायेगा जवाब;
जब छापूंगा ये किताब,
तेरे जख्मों का हिसाब |

29 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट रचना की चर्चा कल रविवार, दिनांक 29 सितम्बर 2013, को ब्लॉग प्रसारण पर भी लिंक की गई है , कृपया पधारें , औरों को भी पढ़ें और सराहें,
    साभार सूचनार्थ

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (29-09-2013) तुकबन्दी: चर्चामंच - 1383 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. प्यार में उचित है रूठना शिकायत करना
    पर ये शिकायतें नहीं ,है एक उत्कृष्ट रचना l
    नई पोस्ट अनुभूति : नई रौशनी !
    नई पोस्ट साधू या शैतान

    ReplyDelete
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    पर ये शिकायतें नहीं ,है एक उत्कृष्ट रचना l
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  9. सुन्दर प्रस्तुति
    आभार भाई प्रदीप जी-

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  10. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  11. bahut hi sundar.....specially
    बस दोस्त कभी कहती,
    कभी प्यार थी बनाती;
    बिन पेंदी के लौटा का,
    तुझे दूंगा मैं खिताब

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    Replies
    1. मेरा बिता हुआ कल याद आ गया काफी अच्‍छी कविता है

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  12. bahut hi sundar.....specially
    बस दोस्त कभी कहती,
    कभी प्यार थी बनाती;
    बिन पेंदी के लौटा का,
    तुझे दूंगा मैं खिताब

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  13. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती,धन्यबाद।

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  14. सुन्दर प्रस्तुति my dear brother ....
    आभार भाई प्रदीप जी-

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  15. सुन्दर रचना।। आभार।।

    नई कड़ियाँ : सदाबहार अभिनेता देव आनंद

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  16. कभी प्यार से की बातें,
    कभी गोलियां जैसे बोली;
    लहू-लुहान किया दिल को,
    क्या तेरा भाई था कसाब ?

    न हो तू यूँ बेताब,
    तुझे मिल जायेगा जवाब;
    जब छापूंगा ये किताब,
    तेरे जख्मों का हिसाब |

    न कहो किसी को कसाब ,
    आजायेगा अजाब दिल के समुन्दर में।

    (अजाब जलजले को भूकंप को कहते हैं )

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  17. kya baat hai srimaan ...................achha hisaav..behatreen andaj

    plz visit here also...and follow me that will be my pleasure

    http://anandkriti007.blogspot.com

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  18. इंजीनियर साहेब |
    बहुत गजब की काव्य रचना हैं जनाब
    ............:)
    यौवन ढलने पर जरुर पछ्तायेंगी |हा हा
    “किन्तु पहुंचना उस सीमा में………..जिसके आगे राह नही!{for students}"

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  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  20. ख़ूबसूरत हास्य रचना

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  21. आपके ब्लॉग को ब्लॉग एग्रीगेटर "ब्लॉग - चिठ्ठा" में शामिल कर लिया गया है। सादर …. आभार।।

    नई चिठ्ठी : हिंदी ब्लॉग संकलक (एग्रीगेटर)

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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