मेरे साथी:-

Monday, September 23, 2013

चलो अवध का धाम

श्री राम लला


 चलो अवध का धाम
भाई रे, चलो अवध का धाम । 
चलो अवध का धाम
बंधु रे, चलो अवध का धाम ।

श्री सरयू घाट

सरयू तट पर बसा मनोरम ,
कण-कण पावन धरा यहाँ की ;
दरश मात्र सब पाप भगाता ,
है सुधा-सी हवा जहाँ की ।


दशरथ जी का राजमहल


सब सुर, देवी यहाँ विराजे ,
जहाँ जन्म लिए राम । 
भाई रे, चलो अवध का धाम । 
बन्धु  रे, चलो अवध का धाम । 


श्री कनक भवन

हनुमान की गढ़ी विशाला,
कनक भवन है दिव्य यहाँ पे ;
राम जन्म भूमि दर्शन कर लो ,
घर-घर देवालय जहाँ पे । 



तुलसी उद्यान


पहर-पहर हर बेला-बेला ,
गूंजता राम का नाम । 
भाई रे, चलो अवध का धाम । 
बन्धु रे, चलो अवध का धाम । 

श्री हनुमान गढ़ी


रामनवमी की अद्भुत मेला ,
बलि बजरंगा स्वयं पधारे ;
लखन, सिया संग राम यहाँ पे ,
झूले झूलन सावन सारे । 


बाल्मीकि भवन



भर लो मन में श्रद्धा प्रभु की,
बोलो जय सिया राम । 
भाई रे, चलो अवध का धाम । 
बन्धु रे, चलो अवध का धाम । 


अयोध्या स्टेशन


श्री राम जय राम जय जय राम !!
जय सिया राम !!!!


सभी चित्र गूगल से साभार । 

16 comments:

  1. सही कहा आपने .सुन्दर सामायिक रचना
    कभी इधर का भी रुख करें
    सादर मदन

    ReplyDelete
  2. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    ReplyDelete


  3. ☆★☆★☆


    सरयू तट पर बसा मनोरम ,
    कण-कण पावन धरा यहाँ की ;
    दरश मात्र सब पाप भगाता ,
    है सुधा-सी हवा जहाँ की ।

    भाई रे, चलो अवध का धाम ।
    बन्धु रे, चलो अवध का धाम ।

    वाऽहऽऽ…!

    प्रिय बंधुवर प्रदीप कुमार साहनी जी
    हम सबको अवध धाम की घर बैठे यात्रा कराने का आपको प्रभु रामजी अवश्य पुण्य देंगे...

    सुंदर रचना के लिए साधुवाद
    आपकी लेखनी से सदैव सुंदर श्रेष्ठ सार्थक सृजन होता रहे...

    शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर सामायिक रचना सहनी जी

    ReplyDelete
  5. आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आप का वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

    ReplyDelete
  6. सुन्दर चित्र से सजी बढ़िया रचना |
    आशा

    ReplyDelete
  7. भर लो मन में श्रद्धा प्रभु की,
    बोलो जय सिया राम ।
    भाई रे, चलो अवध का धाम ।
    बन्धु रे, चलो अवध का धाम ।

    बहुत सुन्दर भाव अर्थ की समन्विति ,काव्य सौष्ठव -

    क्षेपक (उत्तर अंश )देखें :

    पीछे पीछे सिया चलत हैं ,

    आगे आगे राम ,

    बंधू रे यही अवध की शाम ,

    लखन कहें यही अवध की शाम ,

    बंधू सब ले लो प्रभु का राम ,

    नहीं अब और किसी से काम ,

    हमारे तो हैं केवल राम।

    कहें सब निर्बल के बल राम।

    ReplyDelete
  8. सुन्दर चित्र के साथ बहुत सुन्दर कविता!
    Latest post हे निराकार!
    latest post कानून और दंड

    ReplyDelete
  9. श्री राम जय राम जय जय राम !!
    जय सिया राम !!!!

    ReplyDelete
  10. श्री राम जय राम जय जय राम !!
    जय सिया राम !!!!

    ReplyDelete
  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बुधवार - 25/09/2013 को
    अमर शहीद वीरांगना प्रीतिलता वादेदार की ८१ वीं पुण्यतिथि - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः23 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra

    ReplyDelete
  12. bahut hi sundar prastuti , ayodhyaa ka darshan bhi ho gaya . badhai .
    maine ise apni face book par share kiya hai .

    ReplyDelete
  13. शुभकामनाएं। आप हमेशा रचनाशील बने रहें।

    ReplyDelete
  14. खूबसूरत प्रस्तुति

    ReplyDelete

कृपया अपनी टिप्पणी दें और उचित राय दें | आपके हर एक शब्द के लिए तहेदिल से धन्यवाद |
यहाँ भी पधारें:-"काव्य का संसार"

हिंदी में लिखिए:

संपर्क करें:-->

E-mail Id:
pradip_kumar110@yahoo.com

Mobile number:
09006757417

धन्यवाद ज्ञापन

"मेरा काव्य-पिटारा" ब्लॉग में आयें और मेरी कविताओं को पढ़ें |

आपसे निवेदन है कि जो भी आपकी इच्छा हो आप टिप्पणी के रूप में बतायें |

यह बताएं कि आपको मेरी कवितायेँ कैसी लगी और अगर आपको कोई त्रुटी नजर आती है तो वो भी अवश्य बतायें |

आपकी कोई भी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण होगा |

मेरे ब्लॉग पे आने के लिए आपका धन्यवाद |

-प्रदीप