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Saturday, January 21, 2012

दिल से कवि हूँ

संसार के पटल में, मैं एक छवि हूँ,
पेशे से अभियंता और दिल से कवि हूँ |

भावना के उदगार को, व्यक्त ही तो करता हूँ,
हृदय के जज्बात को, प्रकट ही तो करता हूँ;

बस एक "दीप" हूँ, कब कहा रवि हूँ ;
पेशे से अभियंता और दिल से कवि हूँ |

उन्मुक्त साहित्याकाश में, बस घूमा करता हूँ,
काव्य पढता-रचता हूँ और झूमा करता हूँ;

कोशिश होती लिखने की, शब्दों का बढई हूँ,
पेशे से अभियंता और दिल से कवि हूँ |

समाज की सत्यता को वर्णित किया करता हूँ,
सही शब्द सागर से, चयनित किया करता हूँ ;

बस एक माध्यम हूँ, काम करता थवई हूँ,
पेशे से अभियंता और दिल से कवि हूँ |

39 comments:

  1. वाह वाह ....बहुत खूब मित्र।

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  2. अपने कवि दिल को यूँ ही बरक़रार रखिये ....आभार

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  3. अंतिम पंक्तियों के माध्यम से तो आपने कवि ही क्या सभी लेखकों के दिल की बात कह डाली... बहुत खूब सार्थक रचना...

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  4. एक बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई |
    आशा

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    1. आपका आभार आशा जी, यूँही आती रहे |

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी लगाई है!
    सूचनार्थ!

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  6. कोशिश होती लिखने की, शब्दों का बढई हूँ,
    पेशे से अभियंता और दिल से कवि हूँ |सच में आप दिल से कवि है.... बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती.....

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  7. इंजीनियर तो बिलकुल नही लगते,कवि के पूरे लक्षण दिखाई पड़ते है
    मेरी मानना है की आप कवि पहले बाद में अभियंता है,....
    बहुत सार्थक सुंदर प्रस्तुति,बेहतरीन पोस्ट....बधाई
    new post...वाह रे मंहगाई...
    मै फालोवर बन रहाहूँ आप भी बने तो हार्दिक खुशी होगी,..

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    1. प्रदीप जी
      आप शायद फालो करना भूल गए,....देख ले.....

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    2. धन्यवाद धीरेन्द्र जी | आपका ब्लॉग फोलो कर लिया है |

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  8. bahut khoob pardeep bhai ..........me to fan ho gaya apka
    .......behtreen rachnaa

    regrds
    Sanjay bhaskar

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  9. कल 23/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  10. क्या बात है ... बहुत ही कमाल का परिचय है आपका ...
    अच्छा लगा इस कवि से मिलना ...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद दिगंबर जी | इसी तरह हमेशा ब्लॉग में आते रहें |

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  11. बहुत बढ़िया अभिव्यक्त किया अपने आपक को...
    हार्दिक बधाई

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    1. आपका धन्यवाद संजय जी | इसी तरह आते रहें ब्लॉग में |

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  12. बहुत सुन्दर परिभाषित किया है स्वयं को ..अच्छी प्रस्तुति

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    Replies
    1. आभार संगीता जी | इसी तरह ब्लॉग में आते रहें |

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  13. बहुत बढ़िया...
    सचमुच आप दिल से कवि हैं.
    लिखते रहें..लेखनी चिरायु हो..

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  14. आप भावना और शब्दों के शिल्पी हैं अभियंता तो बाद में ही हैं। सुंदर प्रस्तुति।

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  15. वाह !!

    अभियंता भी है
    दिल भी है
    कवी भी है
    गजब है
    थ्री इन वन
    एक ही में हैं ! :))

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  16. वाह बहुत सुन्दरता से परिचय दिया आपने बहुत अच्छी लगी कविता बधाई

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