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Monday, August 1, 2011

मुस्कुरा दिया करना

जिन्दगी रुठी भी रही तो शिकवा नहीं कोई,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना;
घाव भर जायेंगे देख कर ही तुझको,
जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

वर्षों की थकान यूँ ही मिट जायेगी,
नींद बनकर थोड़ा सुला दिया करना;
कभी-भी मन जब काठ बन जाये,
इतना एहसान करना,रुला दिया करना ।

समझ न पाऊँ गर दुनिया की रीत,
हौले से बस थोड़ा समझा दिया करना;
नफरत भरी दुनिया में झुलस जाऊँ थोड़ा,
द्वेष की आग को बुझा दिया करना ।

भाग तो रहा हूँ मंजिल की खोज में,
बैठ जाऊँ थककर, उठा दिया करना;
भाग-दौड़ की दुनिया में,जब भागता ही जाऊँ,
प्यार की छाँव में बिठा दिया करना ।

भुल जाऊँ हर जख्म, भुल जाऊँ हर गम,
सर पर बस हाथ फिरा दिया करना;
जुड़ा है तुझसे,हर श्वास, हर खुशियाँ,
बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना ।

9 comments:

  1. जिन्दगी रुठी भी रही तो शिकवा नहीं कोई,
    बस जब तुझे देखुँ, मुस्कुरा दिया करना;
    घाव भर जायेंगे देख कर ही तुझको,
    जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

    खूबसूरत भाव, सुन्दर रचना.

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  2. बहुत खूबसूरत भाव ... बेहद उम्दा

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  3. घाव भर जायेंगे देख कर ही तुझको,
    जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

    bahit khoob ! badhai !!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति महोदय ||

    बधाई स्वीकार करें ||

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  5. जब पास तेरे आऊँ खिलखिला दिया करना ।

    Bahut sundar ...

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  6. बहुत शानदार रचना लिखी है आपने!
    --
    चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।
    आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।....

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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