मेरे साथी:-

Saturday, June 11, 2011

फूलों की तरह हँसो

फूलों की तरह हँसो, औरों की मुस्कान तू बन,
धन से तुम गरीब ही सही, दिल से ही धनवान तू बन ।

रात देख भयभीत न हो, सुबह होगी इंतजार तो कर,
दुनिया तुझसे प्यार करेगी,औरों से तू प्यार तो कर ।

पर्वत से भी राह मिलेगा, थक कर बस यूँ हार न तू,
तलाश ही ले तू अपनी मंजिल, मन को अपने मार न तू ।

जीत तुझको भी मिलेगी, राह पे अपने चल निकल,
"दीप" दिखा तू औरों को, राह भी तेरा हो उज्ज्वल ।

7 comments:

  1. आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...
    नयी-पुरानी हलचल

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  2. रात देख भयभीत न हो, सुबह होगी इंतजार तो कर,
    दुनिया तुझसे प्यार करेगी,औरों से तू प्यार तो कर
    bahut sundar bhavon se bhari abhivyakti.

    ReplyDelete
  3. रात देख भयभीत न हो, सुबह होगी इंतजार तो कर,
    दुनिया तुझसे प्यार करेगी,औरों से तू प्यार तो कर
    bahut sundar abhivyakti bhavon ki .badhai

    ReplyDelete
  4. प्रदीप जी, आपके ब्‍लॉग पर जाकर अच्‍छा लगा । आपकी कविता सुन्‍दर है । बधाई स्‍वीकारें ।

    ReplyDelete
  5. khubsurat rachna... n thanku for comments....

    ReplyDelete
  6. very inspirational !!

    धन से तुम गरीब ही सही, दिल से ही धनवान तू बन ।
    I wish everyone can think like that.

    ReplyDelete

कृपया अपनी टिप्पणी दें और उचित राय दें | आपके हर एक शब्द के लिए तहेदिल से धन्यवाद |
यहाँ भी पधारें:-"काव्य का संसार"

हिंदी में लिखिए:

संपर्क करें:-->

E-mail Id:
pradip_kumar110@yahoo.com

Mobile number:
09006757417

धन्यवाद ज्ञापन

"मेरा काव्य-पिटारा" ब्लॉग में आयें और मेरी कविताओं को पढ़ें |

आपसे निवेदन है कि जो भी आपकी इच्छा हो आप टिप्पणी के रूप में बतायें |

यह बताएं कि आपको मेरी कवितायेँ कैसी लगी और अगर आपको कोई त्रुटी नजर आती है तो वो भी अवश्य बतायें |

आपकी कोई भी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण होगा |

मेरे ब्लॉग पे आने के लिए आपका धन्यवाद |

-प्रदीप