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Thursday, September 8, 2011

आतंक का अंत

क्या होगा कभी,
इस आतंक का अंत ?
क्या निज़ात पायेंगे,
देर से ही सही या तुरंत ?

आये दिन हो जाता है विस्फोट,
कई जिंदगियों का अस्तित्व उखड जाता है,
हो जाते हैं अनाथ कई मासूम,
और न जाने कितनो का सुहाग उजड़ जाता है |

अस्पतालों का भी तब विहंगम दृश्य होता है,
किसी का हाथ तो किसी का पैर धड़ से अदृश्य होता है |

विस्फोट की आवाज तो क्षणिक होती है,
पर कईयों के कानों में वो जिंदगी भर गूंजती है |

नेता इस में भी राजनीति से नहीं चुकते,
सरकार के नुमाइंदें भी समाधान नहीं, बस आश्वाशन देते हैं |

कब इस दहशत के माहौल से उबरेंगे ?
कब हमारी जिंदगियों की कीमत होगी और वो सुरक्षित होगी ?
कब तक दिल दहलाने वाले ये दृश्य हम देखते रहेंगे ?
कब तक अपनों को इस कदर हम खोते रहेंगे ?

क्या होगा कभी,
इस आतंक का अंत ?
क्या निज़ात पायेंगे,
देर से ही सही या तुरंत ?

10 comments:

  1. काश कोई बताये क्या होगा...बहुत सशक्त रचना...

    नीरज

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई

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  3. बढिया लिखा है !!
    शुभकामनाएं !!

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  4. सामयिक रचना , अच्छा शब्द प्रयोग बधाई

    ReplyDelete
  5. मनमोहन कर दंडवत, लौटा आज स्वदेश,
    भू-खंड एकड़ चार सौ, भेंटा बांग्लादेश |

    भेंटा बांग्लादेश, पाक को कितना हिस्सा,
    काश्मीर का देत, बता दे पूरा किस्सा |

    बड़ा गगोई धूर्त, किन्तु तू भारी अड़चन,
    यहाँ करे यस-मैम, वहां क्यूँ यस-मनमोहन ??


    कायर की चेतावनी, बढ़िया मिली मिसाल,
    कड़ी सजा दूंगा उन्हें, करे जमीं जो लाल |

    करे जमीं जो लाल, मिटायेंगे हम जड़ से,
    संघी पर फिर दोष, लगा देते हैं तड़ से |

    रटे - रटाये शेर, रखो इक काबिल शायर,
    कम से कम हर बार, नया तो बक कुछ कायर ||

    आदरणीय मदन शर्मा जी के कमेंट का हिस्सा साभार उद्धृत करना चाहूंगा -
    अब बयानबाजी शुरू होगी-
    प्रधानमंत्री ...... हम आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देंगे ...

    दिग्गी ...... इस में आर एस एस का हाथ हो सकता है

    चिदम्बरम ..... ऐसे छोटे मोटे धमाके होते रहते है..

    राहुल बाबा ..... हर धमाके को रोका नही जा सकता...

    आपको पता है कि दिल्ली पुलिस कहाँ थी?
    अन्ना, बाबा रामदेव, केजरीवाल को नीचा दिखाने में ?????

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  6. बहुत सार्थक रचना| धन्यवाद|

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