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Wednesday, October 9, 2013

मेरी चाहत

क्या हुआ जो तूने ये होंठ सिल रखे,
आँखों ने तो तेरी सब बयाँ कर दिया,
माना कि प्यार है खामोशियों से तुम्हे,
धडकनों ने शोर यहाँ वहां कर दिया । 

छुपाये रखो जज्बातों को दिल ही दिल में,
ये तो एक हसीं सी अदा है तुम्हारी,
खोले बिना लब को ये क्या किया तूने,
दिल में मेरे तूने अपना निशाँ कर दिया । 

अदब से पेश हुआ नजराना दिल का,
न स्वीकारा न ठुकराया तूने ये क्या किया,
बचती रही अक्सर तुम मुझसे लेकिन,
मेरी चाहत ने मशहूर तेरा जहाँ कर दिया ।

चुप्पी ये तेरी इकरार ही तो है ऐ "दीप",
तुझमें ही अब सबकुछ है पा लिया मैंने,
ख्वाबों की दुनिया में ले चला तुझको,
कहाँ मैं था और तूने कहाँ कर दिया । 

(आज मेरे ब्लॉग को फॉलो करने वाले भद्रजनों की संख्या 100 हो गई है । आप सबके सहयोग, स्नेह और आशीर्वाद के लिए बहुत बहुत आभार । आप सब अपना स्नेह यूँ ही बनाये रखे |)

36 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (10-10-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 142"शक्ति हो तुम
    पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  2. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-10/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -21 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ.

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  3. बहुत सुन्दर रचना |
    लेटेस्ट पोस्ट नव दुर्गा
    नई पोस्ट साधू या शैतान

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  4. बहुत खूब ,मन को प्रभावित करती सुंदर रचना ...!
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ .

    RECENT POST : अपनी राम कहानी में.

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  5. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार भाई -
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें -

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  6. सुन्दर रचना !!
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

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  7. भावों से भरी हुयी कविता के लिए आभार।

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  8. भावो को शब्द दे दिए आपने......

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  9. सुन्दर रचना ..बहुत बढिया..नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

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  10. माना कि प्यार है खामोशियों से तुम्हे,
    धडकनों ने शोर यहाँ वहां कर दिया । ..
    बिलकुल नया उदाहरण प्रदीप भाई .. विजयादशमी की सुभकामनाएँ

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (10-10-2013) "दोस्ती" (चर्चा मंचःअंक-1394) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  12. चुप्पी ये तेरी इकरार ही तो है ऐ "दीप",
    तुझमें ही अब सबकुछ है पा लिया मैंने,
    ख्वाबों की दुनिया में ले चला तुझको,
    कहाँ मैं था और तूने कहाँ कर दिया ।

    बहुत सशक्त भावाभिव्यक्ति। शुक्रिया प्रदीप जी आपकी टिपण्णी का।

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  13. छुपाये रखो जज्बातों को दिल ही दिल में,
    ये तो एक हसीं सी अदा है तुम्हारी,
    खोले बिना लब को ये क्या किया तूने,
    दिल में मेरे तूने अपना निशाँ कर दिया । वाह

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार - 11/10/2013 को माँ तुम हमेशा याद आती हो .... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः33 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  15. वाह वाह
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

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  16. बहुत ही सुन्दर .. दुर्गापूजा की हार्दिक शुभकामनायें

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  17. सुन्दर प्रस्तुति..
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

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  18. चुप्पी ये तेरी इकरार ही तो है ऐ "दीप",
    तुझमें ही अब सबकुछ है पा लिया मैंने,
    बहुत सुन्दर रचना
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ ...
    भ्रमर५

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  19. bahut sundar ..chuppy ki aawaj ko ignore kar hi nahi sakte ...

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  20. संख्या 100 होने पर बल्‍ले बल्‍ले

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  21. प्रेम की सुंदर और सार्थक अभिव्यक्ति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

    आग्रह मेरे ब्लॉग में भी समल्लित हों
    पीड़ाओं का आग्रह---
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  22. मंगलवार 15/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी एक नज़र देखें
    धन्यवाद .... आभार ....

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  23. हार्दिक शुभकामनाएँ

    सुन्दर रचना ...

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  24. मन की भाव को सुन्दर शब्द दिए हैं ...
    दशहरा की मंगल कामनाएं ...

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  25. इस मनभावन रचना के लिए हार्दिक बधाई ..सादर

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  26. Achhi Rachna Ka Prastutikaran. Thank You So Much Sahni Ji.

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  27. बहुत सुन्दर .....

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  28. लीजिये साहब एक और फालोवेर ...बधाई !

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