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Thursday, September 13, 2012

जमाना हर कदम पे लेने इम्तिहान बैठा है

दर्द-ए-दिल समझ के कोई अनजान बैठा है ,
लूटने वाला यहाँ बनके महान बैठा है ,
लाश है कि हिलने का नाम नहीं ले रही ,
और जनाजों के इंतजार में शमशान बैठा है |

नाराज सा देखो ये सारा जहान बैठा है,
मिट्टी का माधो ले सबकी कमान बैठा है,
दिख रहा मुकद्दर बस खामोशियों भरा,
बादलों के इंतज़ार में आसमान बैठा है |

ज़मीरों का भी कोई खोला दुकान बैठा है,
इंसानों के कत्ले-आम को इंसान बैठा है,
चंद सिक्कों से तौले जा रहे हैं लोग अब,
सबको बनाने वाला खुद ऊपर हैरान बैठा है |

गमगीन-सा आज का हर नौजवान बैठा है,
छोड़ कर पंक्षी आज अपनी उड़ान बैठा है,
बड़ा ही रहस्यमय-सा है आज का मंजर,
उत्साह का सागर ही खुद परेशान बैठा है |

भक्त सत्य का आज खाली मकान बैठा है,
भ्रष्ट नाली का कीड़ा बना तुर्रम खान बैठा है,
जीवित लाशों केधर पे शहँशाह-सा बैठा,
जमाना हर कदम पे लेने इम्तिहान बैठा है |
जमाना हर कदम पे लेने इम्तिहान बैठा है |

17 comments:

  1. नाराज सा देखो ये सारा जहां बैठा है,
    मिट्टी का माधो ले सबकी कमान बैठा है,
    दिख रहा मुकद्दर बस खामोशियाओं(खामोशियों)भरा,
    बादलों के इंतज़ार में आसमान बैठा है |

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  2. बादलों के इंतज़ार में आसमान बैठा है,,,,,बहुत खूब,,,प्रदीप जी,,,क्या बात है,,,,

    RECENT POST -मेरे सपनो का भारत

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  3. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 19/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  4. "लाश है कि हिलने का नाम नहीं ले रही ,

    और जनाजों के इंतजार में शमशान बैठा है |"

    श्रीप्रदीपजी,

    आप का काव्य पिटारा मनभावन है जी..!

    धन्यवाद ।

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  5. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.

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  6. सच इम्तिहान ही इम्तिहान है हर कदम पर ...जो संभल कर नहीं चलता जाने कहाँ और कब गिर जाय कुछ पता नही
    ...आज-समाज की तस्वीर दिखाती बढ़िया रचना

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  7. बहुत बढ़िया
    बहुत खूब..
    :-)

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  8. सामयिक विसंगतियों का सुंदर शब्द चित्र.........

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