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Saturday, September 29, 2012

अनाम रिश्ते

कुछ रिश्ते
धरा पर
ऐसे भी हैं,
दुष्कर होता जिनको
परिभाषित करना;
सरल नहीं जिनको
नाम दे पाना,
फिर भी वो होते
गहराइयों में दिल के,
जीवन में समाए,
भावनाओं से जुड़े,
अन्तर्मन में व्याप्त,
औरों की समझ से
बिलकुल परे,
खाश रिश्ते;
दुनिया के भीड़ से
सर्वथा अलग,
नहीं होता जिनमे
बाह्य आडंबर,
मोहताज नहीं होते
संपर्क व संवाद के,
समग्र सरस, सुखद
सानिध्य हृदय के,
हर व्यथा
हर खुशी में
उतने ही शरीक,
अदृश्य डोर के
बंधन में बंधे,
नाम की लोलुपता से
सुदूर और परे,
कशमकश से भरे
अनाम रिश्ते |

13 comments:

  1. अनाम रिश्तों को परिभाषित करना मुश्किल होता है,,,,

    RECENT POST : गीत,

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  2. कल 01/10/2012 को आपकी यह खूबसूरत पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (01-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. सुंदर !

    नाम का रिश्ता हो
    और काम का ना हो
    अच्छा है अनाम का हो
    एक ही रिश्ता कहीं !

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  5. सच में कुछ रिश्ते अनाम होकर भी बहुत नज़दीक होते हैं दिल के...बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर,,,

    अनु

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  7. हर रिश्ता अहम् होता है ...उसे नाम देना जरुरी नहीं है

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