मेरे साथी:-

Monday, September 17, 2012

बुलाया करो

दिलो दिमाग में
यूं छाया करो,
पास कभी आओ
या बुलाया करो;
वफ़ा में जाँ
हम भी दे देंगे,
बस ठेस न दो
न रुलाया करो |

अतिशय प्रेम
बस बरसाया करो,
नैनों में अपने
छुपाया करो;
दूर कर देंगे
हर शिकवा-गिला
एक अवसर तो दो
दिल में बसाया करो |

मन को न
भरमाया करो,
प्रेमगीत नित
गुनगुनाया करो;
छू कर देखो
लफ़्ज़ों को मेरे,
धड़कनों को मेरी
तुम गाया करो |

3 comments:

  1. बहुत खूब,,,सुंदर प्रेम गीत,,,

    RECENT P0ST फिर मिलने का

    ReplyDelete
  2. प्रेम गीत ....अहसास भी है और शब्द भी ...

    ReplyDelete

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