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Thursday, February 11, 2016

ॐ -हे भोलेनाथ- ॐ


हे भोलेनाथ मैं करुँ निवेदन,
आप हो दानी, मैं अकिंचन ।

आप नाथ हो हे त्रिपुरारी,
दास हूँ मैं भोले भंडारी ।



सत्य, शिव और आप हैं सुन्दर,
पूजे जिनको स्वयं ही इंदर ।

अवढर दानी आप को माने,
तनिक हमारे कष्ट भी जाने ।

शिवा समेत कैलाश विराजे,
नाग गला, चन्द्र शीष में साजे ।

महादेव हे हर-हर, हर-हर,
कृपा बनाना नाथ डमरूधर ।

बंदऊँ हे त्रिनेत्र के स्वामी,
चरण वंदना अंतर्यामी ।

कालों के भी काल आप हो,
भूतनाथ विशाल आप हो ।

सोमनाथ हे, आप रामेश्वर
आस बड़ी है, हे परमेश्वर ।

ॐ नम: शिवाय कहूँ मैं,
बिगड़ी दो बनाय कहूँ मैं ।

भक्तों पर सदा कृपा है डाली,
झोली मेरी भी जाय न खाली ।

-प्रदीप कुमार साहनी

2 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (12.02.2016) को "विचार ही हमें बदल सकते हैं" (चर्चा अंक-2250)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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