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Thursday, October 11, 2012

ओ कलम !!

ओ कलम तू लिखना वादों को,
मेरे हर बुलंद इरादों को;
मेरे ऊर की हर बातों को,
हर उठते हुए जज़्बातों को |

मेरे भावों की भाषा बन,
अभिव्यक्ति की अभिलाषा बन;
तू सत्य समाज का उद्धृत कर,
मेरे सपनों को विस्तृत कर |

मेरे शब्दों के पंख लगा,
हर खोट पे जाके दंश लगा;
असत्य न स्वीकार कर,
कुरीतियों पे वार कर |

न व्यर्थ कहीं गुणगान कर,
जो है जायज़ तू मान कर;
गंदगी कभी न माफ कर,
लिख-लिख के उनको साफ कर |

हर ओर ईर्ष्या व्याप्त है,
मानवता बस समाप्त है;
नैतिकता की तू अलख जगा,
बुराइयों पर अग्नि लगा |

ओ कलम न डर न डरने दे,
हुंकार सत्य का भरने दे;
काँटों में भी मुझे राही बना,
लहू का मेरे तू स्याही बना |

पर सत्य मार्ग न छोड़ तू,
नाता हरेक से जोड़ तू;
अच्छा-बुरा जो होता लिख,
तू ध्यान दिला, सब जाए दिख |

ओ कलम तू प्रेरणास्रोत बन,
संदेशों से ओत-प्रोत बन;
लिखा तेरा जो पढे बढ़े,
सोपान उचित हरवक्त चढ़े |

ओ कलम  मेरा हथियार बन,
मेरी सबसे निज यार बन;
अन्तर्मन की तू दूत बन,
मेरु-सा तू मजबूत बन |

जो ना कह पाऊँ मैं मुख से,
तू लिखना बांध उसे तुक से;
साहित्य पटल पर उडती जा,
ओ कलम मेरे शब्द बुनती जा |

24 comments:

  1. पर सत्य मार्ग न छोड़ तू,
    नाता हरेक से जोड़ तू;
    अच्छा-बुरा जो होता लिख,
    तू ध्यान दिला, सब जाए दिख |

    Fantastic !

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    1. ब्लॉग में आने के लिए आभार |

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  2. सुन्दर प्रस्तुति....!
    बढ़िया स्वगत कथन!

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी |

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  3. यदि कलम हाथ में है तो अभिलाषा भी ऐसी ही होनी चाहिए।

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  4. क्या अपनी, परिभाषा लिख दूँ
    क्या अपनी,अभिलाषा लिख दूँ
    शस्त्र कलम को, जब भी कर दूँ
    तख्तो त्ताज ,बदल के रख दूँ

    केंद्र बिंदु, मष्तिक है मेरा
    नये विषय का , लगता फेरा
    लिखता जो , मन मेरा करता
    मेरी कलम से , कायर डरता

    क्रोधित होकर कभी न लिखता
    सदा सहज बन कर ही रहता
    विरह वेदना ,पर भी लिखता
    प्यार भरी भी , रचना करता

    कभी नयन को,रक्तिम करता
    कभी मौन हूँ, सब को करता
    कभी वीरता के , गुण गाता
    दुर्गुण को भी , दूर भगाता

    मन मेरा है, उड़ता रहता
    अहंकार से , हरदम लड़ता
    गुनी जनीं का ,आदर करता
    सारा जग,कवि मुझको कहता

    DHEERENDRA,"dheer"

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,,,,,,,,,,,

    MY RECENT POST: माँ,,,

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    1. आपकी रचना भी बहुत बढ़िया है | धन्यवाद आपका |

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  5. कलम यूँ ही चलती रहे नए स्वप्न बुनती रहे... सुन्दर रचना... शुभकामनायें

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    1. ब्लॉग में आने के लिए धन्यवाद | यूंही उत्साहबर्धन करती रहें |

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  6. ओ कलम तू प्रेरणास्रोत बन,
    संदेशों से ओत-प्रोत बन;
    लिखा तेरा जो पढे बढ़े,
    सोपान उचित हरवक्त चढ़े |
    जय हो इस कलम की ...
    आभार !

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    Replies
    1. उत्साहबर्धन के लिए आभार | इसी तरह आती रहे ब्लॉग में |

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  7. वाह बहुत तेज़ी से कलम का जादू छाने लगा हैं

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  8. बहुत सुंदर रचना...बधाई

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  9. जो ना कह पाऊँ मैं मुख से,
    तू लिखना बांध उसे तुक से;
    साहित्य पटल पर उड़ता जा,
    ओ कलम मेरे शब्द बुनता जा |
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति लयबद्ध एक सुर में पढ़ती चली गई वाह बहुत खूब |

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  10. बहुत बढ़िया....
    कलम आपका कहा कैसे टाले.....

    सुन्दर!!!

    अनु

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  11. जो ना कह पाऊँ मैं मुख से,
    तू लिखना बांध उसे तुक से;
    साहित्य पटल पर उड़ता जा,
    ओ कलम मेरे शब्द बुनता जा |

    Beautiful pradeep ji!

    Jab kabhi padharein mere blog par to ise jarur deikhen!

    दायरे
    www.bhukjonhi.blogspot.com

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    Replies
    1. ब्लॉग में आने के लिए आभार |

      Delete

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