२००वीं पोस्ट
( माँ शारदे की असीम अनुकंपा से सरस्वती पूजा के पावन दिन में इस ब्लॉग की २००वीं प्रस्तुति पेश कर रहा हूँ ।
( माँ शारदे की असीम अनुकंपा से सरस्वती पूजा के पावन दिन में इस ब्लॉग की २००वीं प्रस्तुति पेश कर रहा हूँ ।
इस ब्लॉग पर सौवीं प्रस्तुति भी सरस्वती पूजा के ही दिन 28-01-2012 को हुआ था । बीच में लिखना बंद सा हो गया था, पर माता की कृपा अपरम्पार है ।)
वंदन करुँ हे सरस्वती, आस कृपा का हाथ ।
नित माते मैं ध्यान धरुँ, हो स्नेह बरसात ।।
पूजूँ माते आपको, ले पुष्प की माल ।
दया दिखाना बस तनिक, उन्नत हो यह भाल ।।
ज्ञान दीप बस जल सके, दे इतना आशीष ।
मन ही मन में नाम जपुँ, घंटे मैं चौबीस ।।
परमारथ के मार्ग पर, रहुँ अटल अविचल ।
भक्ति भाव हृदय रहे, पावन व निश्छल ।।
हे माते इस अज्ञ को, दे देना प्रसाद ।
मानस में स्वच्छ भाव रहे, नहीं कोई अवसाद ।।
कलम यूँही चलती रहे, मात ये रखना ध्यान ।
सेवक हूँ वीणापाणि माँ, सदा ही रखना मान ।।
जय जय माते मैं करुँ, हंस विराजिनि आप ।
मेरी लेखनि अस्त्र-शस्त्र, यही मेरा सर-चाप ।।
चतुर्भुजी माँ शारदे, हाथ जोड़ हे प्रणाम ।
आपके ही आशीष से, मिले नए आयाम ।।
१००वीं पोस्ट
सभी को माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
-प्रदीप कुमार साहनी