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Sunday, May 24, 2015

हे हनुमत् !!

पूजूँ, मैं तो तुझे संग राम ,
हे हनुमत, कर देना कल्याण;
भज लूँ, दिन दोपहर व् शाम,
हे हनुमत, कर देना कल्याण ।

राम कृपा सदा साथ तुम्हारे,
तुम हरना प्रभु कष्ट हमारे,
देना, निज भक्ति का दान,
हे हनुमत, कर देना कल्याण ।

हर काम किये बन भक्त राम के,
मुझे देना बुद्धि मूढ़ जान के,
प्रभु, रख लेना मेरा मान,
हे हनुमत, कर देना कल्याण ।

तुम तो हो प्रभु संकटमोचन,
रखना मुझपे कृपा के लोचन,
तुझको, नमन करूँ हनुमान,
हे हनुमत, कर देना कल्याण ।


पूजूँ, मैं तो तुझे संग राम ,
हे हनुमत, कर देना कल्याण;
भज लूँ, दिन दोपहर व् शाम,

हे हनुमत, कर देना कल्याण ।

7 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (26-05-2015) को माँ की ममता; चर्चा मंच -1987 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. जय हनुमान .;बहुत सुंदर

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  3. सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
    शुभकामनाएँ।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  4. बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
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  5. बहुत सुंदर और भावपूर्ण --- जय हनुमान

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