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Wednesday, November 21, 2012

गुमशुदा

रहता है सबके आस-पास ही
फिर भी न जाने कैसे
हो ही जाता है सबका
कभी न कभी कुछ न कुछ-
गुमशुदा |

इस भेड़ चाल के दौर में,
सब कुछ है गुमशुदा;
इसका भी कुछ गुमशुदा,
उसका भी कुछ गुमशुदा |

किसी का ईमान गुमशुदा,
किसी का जहान गुमशुदा;
गुमशुदा है अपने ही अंदर की अंतरात्मा,
जीवित होके भी जान गुमशुदा |

जीवन से बहार गुमशुदा,
किसी का संस्कार गुमशुदा;
गुमशुदा है हृदय के अंदर का बैठा वो भगवान,
तलवार तो है पर धार गुमशुदा |

मतिष्क से एहसास गुमशुदा,
हृदय से जज़्बात गुमशुदा;
गुमशुदा है मानव के अंदर की मानवता,
जुबान तो है ही पर मिठास गुमशुदा |

रिश्तों से विश्वास गुमशुदा,
अपनों पर से आस गुमशुदा;
गुमशुदा है पहले जो होता था परोपकार भाव,
एक दूजे के हृदय में आवास गुमशुदा |

नहीं है किसी को फिकर,
नहीं है किसी को खोज;
जो गुम हो गया वो गुम ही रहे,
जो एक बार गया वो सदैव के लिए-
गुमशुदा |

12 comments:

  1. बहुत बढ़िया विषय उठाया है ।

    प्रिय प्रदीप जी ने ।

    जिन्दगी ही है गुमशुदा

    गमजदा ।।

    शुभकामनायें ।।

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  2. डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"November 21, 2012 at 4:04 PM

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  3. अरुन शर्माNovember 21, 2012 at 4:59 PM

    बहुत ही उम्दा रचना मित्र बधाई

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  4. "गुमशुदा" समाज पर एक तंज हैं। जिसने भी इसे पढ़ा एक कटार सी उनके दिलों पर जरुर चली होगी।

    क्या कहने ... वाह।

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  5. कल 23/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

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  6. बढ़िया प्रस्तुति हार्दिक बधाई

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  7. राजेन्द्र स्वर्णकारNovember 24, 2012 at 12:03 AM

    वाह वाह प्रदीप जी ! एक शब्द के इर्द-गिर्द कितनी सच्चाइयां ! आपकी लेखनी कमाल करती रहे … वाऽह ! क्या बात है !

    सुंदर भाव ! सुंदर शब्द !

    खूबसूरत रचना !

    शुभकामनाओं सहित…

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  8. राजेन्द्र स्वर्णकारNovember 24, 2012 at 12:11 AM

    प्रदीप कुमार जी , कमेंट देने के सिस्टम में पूरी तरह परिवर्तन करलें … कमेंट देने की प्रक्रिया इतनी उबाऊ और समय खाने वाली हो तो कमेंट की इच्छा ही खत्म हो जाती है … # और कमेंटकर्ता के नाम को क्लिक करने पर भी आपके ही ब्लॉग के खुलने का सिस्टम तो आपके यहां ही देखा … :( भई ! आपके कमेंटकर्ता तक कोई और न पहुंचे इसके पीछे क्या मंशा है ??

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  9. लोकतंत्र से है लोक जुदा ,

    नेता से है ईमान जुदा ,

    तू मुझसे मैं तुझसे जुदा ,

    या खुदा .

    बढ़िया पोस्ट है गम शुदा ,

    तलाश गुमशुदगी की ,

    लिखा रपट इस गुमशुदा की .

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  10. बढ़ि‍या...यहां सब कुछ है गुमशुदा

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