मेरे साथी:-

Wednesday, July 6, 2011

कि मैं साथ हूँ

न हो तू उदास
कि मैं साथ हूँ,
रहेंगी खुशियाँ पास
कि मैं साथ हूँ ।

करना मेरा विश्वास
कि मैं साथ हूँ,
न हो तू उदास
कि मैं साथ हूँ ।

गम का बादल तुझपे कभी छाने नहीं दुँगा,
कमल-सा ये चेहरा मुर्झाने नहीं दुँगा ।
मुस्कान आयेगी रास
कि मैं साथ हूँ,

न हो तू उदास
कि मैं साथ हूँ ।

साथ ले चलुँगा तुझे, कभी खोने नहीं दुँगा,
टूट भी जाऊँ मैं भले, तुझे रोने नहीं दुँगा ।
रखुँगा तेरा आस
कि मैं साथ हूँ,

न हो तू उदास
कि मैं साथ हूँ ।

एक भी स्वप्न आँखों का कभी टूटने नहीं दुँगा,
जिंदगी की दौड़ में पीछे छुटने नहीं दुँगा ।
रहोगे तुम खाश
कि मैं साथ हूँ,

न हो तू उदास
कि मैं साथ हूँ ।

19 comments:

  1. बढ़िया रचना!
    आपकी भानमाओं की दाद देता हूँ!

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  2. बहुत-बहुत बढ़िया रचना ||

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  3. धन्यवाद् रविकर जी एवं मनीष जी |

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  4. सुंदर कविता, भावनाओं से भरी,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

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  6. bahut pyari bahut achche bhaavon se paripoorn kavita.

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  7. शास्त्री जी बहुत बहुत धन्यवाद् आपका सूचित करने के लिए |

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  8. राजेश कुमारी जी आपका हार्दिक आभार मेरे ब्लॉग में आने के लिए | इसी तरह मेरी रचनाओं में अपनी दृष्टि प्रदान करते रहें और हमे कृतार्थ करें |
    धन्यवाद् |

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  9. बेहतरीन प्रस्‍त‍ु‍ति ।

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  10. bahut hi acchi kavita..aapka prayas charcha manch pe charcha ka bishay bana is hetu hardik badhaiyi

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  11. kisi ko bhi nirasha ke janglo se kheench laane ke liye ye 3 shabd kafi hain. sunder prastuti.

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  12. "Ashu" जी एवं अनामिका जी बहुत बहुत धन्यवाद । इसी तरह मेरे ब्लॉग में पधारते रहें ।

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  13. सुंदर ...अभिब्यक्ति
    हार्दिक बधाई ...

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