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Tuesday, January 22, 2013

हे नेताजी ! प्रणाम करूँ

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
जन्म: 23 जनवरी 1887

नेताजी के जयंती पर अनेकानेक श्रद्धांजलि !!!
हे नेताजी ! प्रणाम करूँ,
तेरे आगे निज शीश धरूँ |

नहीं कोई भक्त माँ भारत का,
तुझ जैसा कभी हो पाया है;
लाल महान तुम इस धरती के,
कोई न तुझसा हो पाया है |

हे नेताजी ! प्रणाम करूँ,
तेरे आगे निज शीश धरूँ |

जिस आज़ादी के दम पर अब,
हम सब यूं इठला सकते हैं;
पाने को तुम लड़े जान से,
कभी न हम झुठला सकते हैं |

हे नेताजी ! प्रणाम करूँ,
तेरे आगे निज शीश धरूँ |

कहाँ तेरे सपनों का भारत,
अब तक हम बनवा पाये हैं;
एक देश हो, हो समानता,
कहाँ ऐसा करवा पाये हैं |

हे नेताजी ! प्रणाम करूँ,
तेरे आगे निज शीश धरूँ |

लेना होगा प्रण हम सबको,
आदर्शों पर चले तुम्हारे;
वही सच्ची श्रद्धांजलि तुमको,
कर्म हो श्रद्धा सुमन हमारे |

हे नेताजी ! प्रणाम करूँ,
तेरे आगे निज शीश धरूँ |

Wednesday, December 26, 2012

ख्वाब क्या अपनाओगे ?

प्रत्यक्ष को अपना न सके, ख्वाब क्या अपनाओगे;
बने कपड़े भी पहन न पाये, नए कहाँ सिलवाओगे |

दुनिया उटपटांगों की है, सहज कहाँ रह पावोगे,
हर हफ्ते तुम एक नई सी, चोट को ही सहलाओगे |

सारे घुन को कूट सके, वो ओखल कैसे लावोगे,
जीवन का हर एक समय, नारेबाजी में बिताओगे |

जीवन भर खुद से ही लड़े, औरों को कैसे हराओगे,
मौके दर मौके गुजरे हैं, अंत समय पछताओगे |

गमों को हंसी से है छुपाया, आँसू कैसे बहाओगे,
झूठ का ही हो चादर ओढ़े, सत्य किसे बतलाओगे |

सीख न पाये खुद ही जब, क्या औरों को सिखलाओगी,
बने हो अंधे आँखों वाले, राह किसे दिखलाओगे |

व्यवस्था यहाँ की लंगड़ी है, क्या लाठी से दौड़ाओगे,
बोल रहे बहरे के आगे, दिल की कैसे सुनाओगे |

हक खुद का लेने के लिए भी, हाथ बस फैलाओगे,
भीख मांगने के ही जैसा, हाथ जोड़ गिड़गिड़ाओगे |

लोकतन्त्र के राजा तुम हो, प्रजा ही रह जाओगे,
कृतघ्न हो जो वो प्रतिनिधि, खुद ही चुनते जाओगे |

Sunday, December 23, 2012

हाँ, मुद्दा यही है


हाँ,
मुद्दा यही है,
पर क्या ये सही  है,
वास्तविकता का कोई अंश है,
या सब ढपोरशंख है,
एक तरफ चीर हरण है,
फिर अनशन आमरण है,
क्या वाकई हृदय का जागरण है ?
हाँ, तावा वस्तुतः गरम है,
कई सेंक रहे रोटी नरम है,
चाह सबकी एक नई दिशा है,
पर दिखती दूर-दूर तक निशा है |
ओज है, साहस है,
पर मिलता सिर्फ ढाढ़स है |
चोर ही चौकीदार है,
कौन वफादार है ?

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