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Friday, April 6, 2012

विनती

पवन तनय तुम अंतर्यामी, विघ्न हरो हे सबके स्वामी |
दूर करो हर कष्ट राह के, उर में बसो संग सिय राम के ||

बल बुद्धि के आप निधाना, गावो बस तुम राम गुण-गाना |
बल विवेक प्रभु हमको देना, सब अवगुण को तुम हर लेना ||

नित भज लूँ प्रभु नाम तुम्हारा, तुम ही तो हो नाथ हमारा |
विपदा मेरी मिटाना देवा,           तत्पर हो करूँ तेरी सेवा ||

शंकर सुवन तुम हे दुख भंजन, भक्ति तेरी ज्यों पावन चन्दन |
भक्तों का तू जीवन तर दे,          भक्ति भाव से झोली भर दे ||

अंजनी सूत तुम राम के दासा, पूर्ण करो इस मन की आशा |
विनय करूँ तेरी हे हनुमाना, विनती मेरी तुम ना ठुकराना ||

सभी को महा प्रभु हनुमत जी की जयंती की बधाइयाँ |

5 comments:

  1. bahut achchi chaupaaiyan hain.ram bhakti me leen.

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति....हनुमान जयंती की ढेरों शुभकामनाये

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  3. वाह!!!!!!बहुत सुंदर रचना,अच्छी प्रस्तुति........

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

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  4. बहुत ही अच्छी रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  5. बहुत बढ़िया,,
    आपको अनेक शुभ कामनाए......

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