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Tuesday, March 22, 2016

चलो नया एक रंग लगाएँ

लाल गुलाबी नीले पीले,
रंगों से तो खेल चुके हैं,
इस होली नव पुष्प खिलाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

मानवता की छाप हो जिसमे,
स्नेह सरस से सना हो जो,
ऐसी होली खूब मनाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

जात-पात की हर दीवारें,
और न दिखे हम सब में,
रंगों से रंगभेद मिटाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

हो राष्ट्रप्रेम हर दिल में बस,
भारत माँ की जयकार हो,
राष्ट्रवाद हर ओर फैलाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

इस समाज की कुव्यवस्था पर,
चोट करे हम हरदम ही,
नव पीढ़ी को सही सिखाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

सही को सही कह पाये हम,
गलत हो जो धिक्कार करें,
मन में नव रंगोली सजाएँ,
चलो नया एक रंग लगाएँ ।

-प्रदीप कुमार साहनी

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (23-03-2016) को "होली आयी है" (चर्चा अंक - 2290) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रंगों के महापर्व होली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. अच्छी कविता प्रदीप जी , होली की शुभकामनाएँ

    ReplyDelete

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