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Tuesday, October 11, 2011

आबो हवा

नहीं रहा अब
दुनिया पे यकीन,
भरोसे जैसी कोई
अब चीज कम है ;
बदल गये लोग
बदल गई मानसिकता,
बदल गई सोच
खतम हुई नैतिकता ;
हमने ही सब बदला
और कहते हैं आज
कि अच्छी नहीं रही
अब आबो हवा |

12 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति, बधाई स्वीकारें /

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  2. shandaar prastuti...kya baat hai ek jamane se darshan nahi hue aapke mere blog per...badhayee aaur amantran ke sath

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  3. समय मिले तो कभी आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com

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  4. सुन्दर प्रस्तुति, बधाई

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  5. बहुत ही खुबसूरत प्रस्तुति ||
    बधाई महोदया ||

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  6. बहुत ही भावपूर्ण रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  7. आशुतोष जी बहुत बहुत धन्यवाद |

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  8. Pallavi जी आपका आभार ब्लॉग में आने के लिए |

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  9. कुश्वंश जी बहुत-बहुत धन्यवाद |

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