मेरे साथी:-

Tuesday, January 24, 2012

शबनमी ये रात

बड़ी ही शबनमी-सी है ये रात,
क्यों न मचले हृदय के जज्बात,
आशा में देवी निद्रा से हसीन मुलाकात,
आँखों ही आँखों में ज्यों हो जाए बात ।

करवटों में बीते ये रात की गहराईयाँ,
एक अकेले हम और जाने कितनी परछाईयाँ,
पल-पल का सफर दुष्कर उसपे ये तनहाईयाँ,
आगोश में ले लूँ आकाश, भर लूँ अँगड़ाईयाँ ।

सरगमीं ये कैसी दिल में कैसी ये हलचल,
धड़कनों की रफ्तार यूँ बढ़ती है पल-पल,
आकस्मिक अस्थिरता पर मन है अविचल,
शबनमी ये रात है या कोई प्यारी गज़ल ।

21 comments:

  1. आकस्मिक अस्थिरता पर मन अविचल रह जाए ,
    तभी शबनमी रात में कोई प्यारी गजल बन पाती है.... :):)

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर भावपूर्ण अहसासों अच्छी रचना,..क्या बाते है प्रदीप जी
    WELCOME TO NEW POST --26 जनवरी आया है....
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए.....

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका धन्यवाद धीरेन्द्र जी |

      Delete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    गणतन्त्रदिवस की पूर्ववेला पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका बहुत बहुत आभार शास्त्री जी |

      Delete
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. शबनमी रात और लेखनी में बिखरते जज़्बात.....वाह बहुत खूब

    ReplyDelete
  6. जज्बातो की वो सुन्दर रात शबनमी लगी......

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद महेश्वरी जी |

      Delete
  7. Replies
    1. धन्यवाद माथुर साहब |

      Delete
  8. बहुत सुदर। मेरी कामना है कि आप सृजनरत रहें । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद महाशय ब्लॉग में आने के लिए |

      Delete
  9. बहूत सुंदर
    बेहतरीन अभिव्यक्ती ..

    ReplyDelete
  10. अधिकाधिक सुन्दर है कविता,
    लिखी हुई यह सहज भाव से।
    उतर गई यह मेसे दिल में,
    इसे पढ़ा है बहुत चाव से।
    कृपया इसे भी पढ़े-
    क्या यही गणतंत्र है

    ReplyDelete
    Replies
    1. दिनेश जी हार्दिक आभार |

      Delete
  11. my website is mechanical Engineering related and one of best site .i hope you are like my website .one vista and plzz checkout my site thank you, sir.
    http://www.mechanicalzones.com/2018/11/what-is-mechanical-engineering_24.html

    ReplyDelete

कृपया अपनी टिप्पणी दें और उचित राय दें | आपके हर एक शब्द के लिए तहेदिल से धन्यवाद |
यहाँ भी पधारें:-"काव्य का संसार"

हिंदी में लिखिए:

संपर्क करें:-->

E-mail Id:
pradip_kumar110@yahoo.com

Mobile number:
09006757417

धन्यवाद ज्ञापन

"मेरा काव्य-पिटारा" ब्लॉग में आयें और मेरी कविताओं को पढ़ें |

आपसे निवेदन है कि जो भी आपकी इच्छा हो आप टिप्पणी के रूप में बतायें |

यह बताएं कि आपको मेरी कवितायेँ कैसी लगी और अगर आपको कोई त्रुटी नजर आती है तो वो भी अवश्य बतायें |

आपकी कोई भी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण होगा |

मेरे ब्लॉग पे आने के लिए आपका धन्यवाद |

-प्रदीप